Nafrat Shayari in Hindi नफ़रत शायरी हिंदी में


बचपन से लेकर आज तक सबकुछ खोया गया,

एक तू भी ना मिले तो शिकायत कैसी.


टूटी फूटी कश्ती और एक खुशक समंदर देखा था,

रात मैने झांक के शायद अपने ही अंदर देखा था.


इंसान बड़ा खुदगर्ज है,

पसंद करे तो बुराई नहीं देखता,

नफ़रत करे तो अच्छाई.







जो भी रस्में थी ज़माने की उसे निभाने दिया.,

उसे जाना था और हमने जाने दिया.


तू बेशक नफ़रत कर,

ख्वाब तेरे ही रहेंगे हमेशा,

मुझे भरोसा है अपनी आंखों पर.


मैं कहां देखने से थका हु तुझे,

पूछ जाके तू तेरी तस्वीर थक गई होगी.



मसला तुझे पाने का कभी था ही नहीं,

इरादा उम्र भर चाहने का था जो आज भी कायम है.



उन मन्नतों के धागों का क्या करता होगा खुदा,

जिनकी मन्नत वो अधूरी छोड़ देता है.


मिट्टी के बने शरीर को ये गुरुर हो चला कि,

शरीर पर लगी धूल उसकी शान कम कर देगी.



मुस्कुराहटों लाजवाब थी हमारी भी,

पसंद आई थी किसी को वो लेकर चला गया.



सबसे ज्यादा मुश्किल उस दरवाजे पर दस्तक देना है,

जिसकी चाबियां कभी आपने पास रही हो.


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