खुदा ने पूछा क्या सजा दूँ उस बेवफा को,
दिल ने कहा मोहब्बत हो जाए उसे भी,
और कोई छोड़ के चले जाये उसे भी !
दिल में आने का तो रास्ता होता है पर,
जाने का नही इस लिए जब भी कोई इंसान जाता है,
दिल तोड़ कर ही जाता है !
तुम क्या जानो बेवफाई की हद ये दोस्त,
वो हमसे इश्क सीखता रहा किसी और के लिए !
हमको दिल से भी निकाला गया, फिर शहर से भी,
हमको पत्थर से भी मारा गया, और जहर से भी !
तेरी बेवफाई का गम तो नहीं,
मगर तू बेवफा है दुःख ये भी कम नहीं !
हम इश्क़ में वफ़ा करते करते बेहाल हो गए,
और वो बेवफाई करके भी खुशहाल हो गए।
जब आपको बिना गलती के सजा मिले,
तो उसे Bewafai कहा जाता है।
मोहब्बत में ऐसा क्यों होता है,
बेवफाई में वो रोते हैं और वफ़ा में हम रोए हैं।
सब कुछ होते हुए भी इस दिल का दर्द नहीं जाता,
क्यूंकि किस्मत ने हमें Bewafai बना दिया।
दुनिया वालों का भी अजीब दस्तूर है बेवफाई मेहबूब से मिलती है ,
और बेवफा मोहब्बत बन जाती है।
जिससे हमने Bewafai पायी,
वो हमसे वफ़ा की उम्मीद करते हैं,
दिल पर जख़्म देके, निशान शरीर पर ढूंढ़ते हैं।
तेरा ख्याल दिल से मिटाया नहीं अभी,
बेवफा मैंने तुझको भुलाया नहीं अभी।
हमसे न करिये बातें यूँ बेरुखी से सनम,
होने लगे हो कुछ-कुछ बेवफा से तुम।

































