वो तस्वीर दिखा कर समांझती है अपने बेटे को,
बेरोजगार आदमी किसी काम का नही.
तुमने तो सिर्फ सुना है, हमपर तो बीती है,
ये जो मोहब्बत है ना, सच में खून पीती है.
हम उसके आदि थे,
उसी ने अंत लिख डाला.
बहुत महंगे थे हम, पर अब सस्ते में नहीं आयेंगे,
जा, छोड़ दिया तुझको, अब तेरे रस्ते नही आयेंगे.
जब तुम्हे लगे की तुम सिर्फ मेरे हो,
तब आने मैं बिलकुल भी देरी मत करना.
किन शब्दों में लिखूं मैं तेरी कमी को,
बस तेरे बिना हर शाम अधूरी लगती है.
हार गया मैं तुझसे ए जिंदगी,
बेहतर होगा तू अब मेरा हिसाब करदे.
ओर फिर वो घर वीरान हो गया,
जिस घर की दुल्हन बनने की उसने कसमें खाई थी.
अपने हाथो से आजाद कर दिया,
जिस परिंदे में जान थी मेरी.
अब जो थक कर बैठ गया है मेरा दिल,
बहुत भागा था किसी के पीछे.


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