और आखिर में सारे सपने टूट गए,
टूटे सपनो ने मुझे खत्म कर दिया.
अब तेरे लौटने की आस नही,
इसलिए भी ये दिल उदास नही,
कुछ नहीं चाहिए किसी से मुझे,
और कुछ भी किसी के पास नहीं.
अब जो छूट रहा है, छूट जाएं,
जो बिखर रहा है, बिखर जाए,
आखिर संभालने समेटने की भी तो उम्र होती है.
की उसके इश्क के रंग में ऐसे रंगे अपना रंग रूप खो बैठे,
उसे भी पा ना पाए, अपने आप को भी खो बैठे.
मैं लिखूंगा तुम्हे और बेहिसाब लिखूंगा,
कुछ पंक्तियां नही, पूरी एक किताब लिखूंगा,
तुम जो ये सोचती हो के मैं भूल जाऊंगा,
माना सीधा साधा लड़का हु लडूंगा नही, पर,
इश्क के नाम पर मिले हर दर्द का हिसाब लिखूंगा.
गम है के बरबाद हो रहा हु,
नाज़ है के तुम कर रहे हो.
तुम मुझे नही छोड़ोगी, ये मुझे पता था,
कहीं का नही छोड़ोगी, ये नही पता था.
और फिर मैं उसे बहुत देर तक देखता रहा,
जब उसने बताया कल मुझे देखने वाले आए थे.
मजबूरी तो खाक थी उसकी,
वो शख्स मुझे चुनना ही नहि चहता,



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