2 line Gulzar Shayari/Gulzar Shayari in Hindi 2 lines

 “पढ़ना तुम्हें नहीं आता किताब क्या करे,आंखें तुम भूल गए हिजाब क्या करें।”


बेहिसाब हसरते ना पालियेजो मिला हैं उसे सम्भालिये...


किसी पर मर जाने से होती हैं मोहब्बत,इश्क जिंदा लोगों के बस का नहीं


दिल अगर हैं तो दर्द भी होंगा,इसका शायद कोई हल नहीं हैं


बहुत अंदर तक जला देती है,वो शिकायतें जो बयाँ नहीं होती


मैंने दबी आवाज़ में पूछा - "मुहब्बत करने लगी हो?"नज़रें झुका कर वो बोली - "बहुत


“कभी जुगनू कभी सपनो सा लगता है,वो एक ना जाने कितनो सा लगता है,अंधों को भी उसमे एक रौशनी दिखती है,गैरों को भी वो अपनों सा लगता है.”


बचपन में भरी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला'जब से डिग्रियां समझ में आयी पांव जलने लगे हैं


कुछ जख्मो की उम्र नहीं होती हैंताउम्र साथ चलते हैं, जिस्मो के ख़ाक होने तक


हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनकोक्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया


किसी पर मर जाने से होती हैं मोहब्बत,इश्क जिंदा लोगों के बस का नहीं



कभी जिंदगी एक पल में गुजर जाती हैंऔर कभी जिंदगी का एक पल नहीं गुजरता








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