Hindi sad shayari for girl

 सुकून न दे सकीं राहतें ज़माने भर की,

जो नींद आई तेरे ग़म की छाँव में आई।

 ग़म-ए-इश्क का मारा हूँ मुझे न छेड़ो,

जुबां खुलेगी तो लफ़्ज़ों से लहू टपकेगा।

 





तकलीफ तो होती है मगर मुस्कुराना जनता है.....

तकलीफ तो होती है मगर

मुस्कुराना जनता है...

और तुम्हारे ना होने का गम ....

तुम्हारे ना होने का गम...

छुपाना भी जनता है…

 

चेहरे अजनबी हो जाये तो कोई बात नहीं,

मोहब्बत अजनबी होकर बड़ी तकलीफ देती है।

एक न एक दिन मैं ढूँढ ही लूंगा तुमको,

ठोकरें ज़हर तो नहीं कि खा भी ना सकूँ ।

 

 

 इक नाम क्या लिखा तेरा साहिल की रेत पर,

फिर उम्र भर हवा से मेरी दुश्मनी रही।

बिछड़कर फिर मिलेंगे यकीन कितना था,

बेशक ये ख्वाब था मगर हसीन कितना था

 

 

किस्मत से हार गए

वरना

मोहब्बत तो सच्ची थी

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