बरबाद कर देती हैं मुहब्बत
हर
मुहब्बत करने वाले को
क्योकि
इश्क हार नहीं मानता
ओर
दिल बात नहीं मानता
मेरी आँखों को सुकून दिला जाओ न
अपने
प्यार का अहसास करा जाओ न
ये
दूरियाँ कहीं मेरी जान न
निकाल
दें मेरी जान अब तो मिलने आ जाओ न
वक्त
नूर को बेनूर कर देता है
छोटे
से जख्म को नासूर कर देता है
कौन
चाहता है अपनों से दूर रहें
पर
हालात एक दूसरे को मजबूर कर देता है
फिर
छत से इशारा करना है,
इस
दिल को आवारा करना है
सब जख्म पुराने सूख गए
मुझे
प्यार दोबारा करना है ।।
सलीके
हमें भी आते है उन्हें कब्ज़े में करने के,
मुर्शिद
उनसे कहदो अपनी अदाओं पर गुरूर न करें…!
कोई
मुझे मेरी तरह चाहे तो बात है,
वरना
मुझे नहीं लगता कि, इश्क में कोई खास बात है…!
कोई
मुझे मेरी तरह चाहे तो बात है,
वरना
मुझे नहीं लगता कि, इश्क में कोई खास बात है...!


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